भारत में शेयर के मुनाफ़े पर टैक्स कैसे लगता है (LTCG बनाम STCG)?
शेयर पर मुनाफ़ा "कैपिटल गेन" है। एक साल से कम रखा तो शॉर्ट-टर्म (STCG); एक साल से ज़्यादा तो लॉन्ग-टर्म (LTCG) — टैक्स अलग। बेचने से पहले जान लें।
जब आप कोई शेयर या इक्विटी फंड खरीद-मूल्य से ज़्यादा पर बेचते हैं, तो मुनाफ़ा "कैपिटल गेन" होता है, और भारत में यह टैक्स योग्य है। कितना टैक्स लगेगा यह मुख्य रूप से इस पर निर्भर करता है कि बेचने से पहले आपने निवेश कितने समय तक रखा — होल्डिंग अवधि तय करती है कि यह शॉर्ट-टर्म है या लॉन्ग-टर्म।
लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड के लिए, 12 महीने से ज़्यादा रखने पर मुनाफ़ा "लॉन्ग-टर्म" (LTCG) होता है; 12 महीने या उससे कम रखने पर "शॉर्ट-टर्म" (STCG)। दोनों पर अलग दरों से टैक्स लगता है, और एक सालाना सीमा तक LTCG कर-मुक्त है — सटीक दरें और सीमाएँ सरकार तय करती है और सालों में बदलती रही हैं, इसलिए बेचने से पहले मौजूदा आँकड़े ज़रूर जाँचें।
यह क्यों मायने रखता है: टैक्स आपके असली रिटर्न को काफ़ी बदल सकता है, और एक-साल के निशान के आसपास बिक्री का समय तय करने से वह शॉर्ट-टर्म से लॉन्ग-टर्म में बदल सकता है। यह सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं — अपनी स्थिति के लिए ताज़ा नियम देखें या किसी टैक्स पेशेवर से सलाह लें।
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आम सवाल
LTCG और STCG में क्या फ़र्क़ है?
फ़र्क़ होल्डिंग अवधि का है: लिस्टेड शेयर/इक्विटी फंड में 12 महीने से ज़्यादा रखी होल्डिंग पर मुनाफ़ा लॉन्ग-टर्म (LTCG); 12 महीने या कम पर शॉर्ट-टर्म (STCG)। दोनों पर अलग दरें, और एक सालाना सीमा तक LTCG कर-मुक्त।
अगर मैं पैसा नहीं निकालूँ तो भी टैक्स लगेगा?
कैपिटल गेन टैक्स आमतौर पर तब लगता है जब आप बेचते हैं (मुनाफ़ा वसूलते हैं), सिर्फ़ रखे रहने पर नहीं। बेचकर दोबारा खरीदने से आपकी होल्डिंग अवधि रीसेट हो जाती है, जो LTCG बनाम STCG को प्रभावित कर सकती है।