निफ्टी 50 और सेंसेक्स क्या हैं?
सेंसेक्स (30 शेयर, BSE) और निफ्टी 50 (50 शेयर, NSE) भारत के बेंचमार्क सूचकांक हैं — ऐसी टोकरियाँ जो बताती हैं कि पूरा बाज़ार कैसा चल रहा है।
सूचकांक (इंडेक्स) कई शेयरों की एक टोकरी है जिसे एक संख्या में बदल दिया जाता है, ताकि एक नज़र में दिखे कि बाज़ार किस दिशा में है। भारत के दो मुख्य सूचकांक हैं — सेंसेक्स (BSE की 30 बड़ी कंपनियाँ) और निफ्टी 50 (NSE की 50 बड़ी कंपनियाँ)। जब ख़बर कहती है "बाज़ार 1% चढ़ा", तो आमतौर पर इन्हीं में से किसी की बात होती है।
सूचकांक की कंपनियाँ बाज़ार का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनी जाती हैं और ज़्यादातर आकार (फ्री-फ्लोट मार्केट कैप) के हिसाब से वज़न पाती हैं। रिलायंस, HDFC बैंक, TCS, इंफोसिस जैसे बड़े नाम सबसे ज़्यादा वज़न रखते हैं, इसलिए उनकी चाल सूचकांक को सबसे ज़्यादा हिलाती है।
आप सीधे "निफ्टी" नहीं खरीद सकते, पर एक इंडेक्स फंड या ETF खरीद सकते हैं जो इसे ट्रैक करता है। ज़्यादातर शुरुआती निवेशकों के लिए कम लागत वाला इंडेक्स फंड पूरे बाज़ार को रखने का सबसे आसान तरीक़ा है।
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आम सवाल
निफ्टी और सेंसेक्स में क्या फ़र्क़ है?
दोनों बड़ी भारतीय कंपनियों को ट्रैक करते हैं। सेंसेक्स BSE के 30 शेयर हैं; निफ्टी 50 NSE के 50 शेयर। दोनों लगभग साथ चलते हैं क्योंकि कई बड़ी कंपनियाँ साझा हैं।
क्या मैं सीधे निफ्टी 50 में निवेश कर सकता हूँ?
सूचकांक में सीधे नहीं, पर एक निफ्टी 50 इंडेक्स फंड या ETF खरीद सकते हैं, जो सभी 50 शेयरों को उसी अनुपात में रखता है और बहुत कम लागत पर सूचकांक को ट्रैक करता है।