ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) क्या है?
ROCE मुनाफ़े को कंपनी की पूरी पूँजी — इक्विटी और कर्ज़ दोनों — के मुक़ाबले मापता है। अलग-अलग कंपनियाँ पैसे को कितनी कुशलता से इस्तेमाल करती हैं, यह आँकने का सबसे निष्पक्ष तरीक़ा।
रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) ऑपरेटिंग मुनाफ़े को कंपनी द्वारा इस्तेमाल की गई पूरी पूँजी — शेयरधारकों की इक्विटी और उधार लिया पैसा दोनों — के प्रतिशत के रूप में मापता है। चूँकि यह कर्ज़ को भी गिनता है, इसे फुलाना ROE से कठिन है, इसीलिए कई निवेशक कारोबार की गुणवत्ता आँकने के लिए इसे पसंद करते हैं।
ROCE पूछता है: पूँजी चाहे कहीं से आई हो, कंपनी हर रुपये से कितना ऑपरेटिंग मुनाफ़ा निचोड़ती है? सालों तक ऊँचा, स्थिर ROCE एक टिकाऊ प्रतिस्पर्धी बढ़त का संकेत देता है — कंपनी सस्ते कर्ज़ के बिना ही मज़बूत रिटर्न कमाती है।
ROCE की तुलना उधारी की लागत से करें। अगर कंपनी 9% पर कर्ज़ लेते हुए 20% ROCE कमाती है, तो वृद्धि सचमुच मूल्य बनाती है। अगर ROCE उधारी लागत से नीचे है, तो विस्तार चुपचाप मूल्य घटा रहा है, भले मुनाफ़ा बढ़ता दिखे।
फ़ॉर्मूला
ROCE = ऑपरेटिंग मुनाफ़ा (EBIT) ÷ इस्तेमाल की गई पूँजी × 100
उदाहरण
₹300 करोड़ ऑपरेटिंग मुनाफ़ा और ₹1,500 करोड़ इस्तेमाल की गई पूँजी वाली कंपनी का ROCE 20% है। अगर वह 9% पर कर्ज़ लेती है, तो हर पुनर्निवेशित रुपया मूल्य बना रहा है।
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आम सवाल
क्या ROCE, ROE से बेहतर है?
अलग-अलग कर्ज़ स्तर वाली कंपनियों की तुलना के लिए हाँ — ROCE कर्ज़ को शामिल करता है, इसलिए उधारी से फूलता नहीं। कई निवेशक दोनों देखते हैं: शेयरधारक रिटर्न के लिए ROE, कारोबारी गुणवत्ता के लिए ROCE।
अच्छा ROCE कितना होता है?
लगातार ~15–20% से ऊपर का ROCE (और कंपनी की उधारी लागत से आराम से ऊपर) भारत में मज़बूत माना जाता है, पर उसी उद्योग के भीतर तुलना करें।